April 4, 2025
Anant Chaturdashi

Anant Chaturdashi 2024: इस साल कब मनाई जाएगी अनंत चतुर्दशी? श्रीहरि की पूजा से सभी मुरादें होंगी पूरी

Anant Chaturdashi

Anant Chaturdashi 2024: इस साल कब मनाई जाएगी अनंत चतुर्दशी? श्रीहरि की पूजा से सभी मुरादें होंगी पूरी

भारत में प्रत्येक त्योहार का अपना विशेष महत्व होता है, और इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण त्योहार है Anant Chaturdashi। यह पर्व भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है और इसे भगवान विष्णु की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा की जाती है, जिससे भक्तगण सभी मनोकामना पूर्ति की कामना करते हैं।

अनंत चतुर्दशी की तिथी

Anant Chaturdashi 2024 इस साल 17 सितंबर को मनाया जाएगा । यह दिन विशेष माना जाता है क्यों कि गणपति विसर्जन के लिए भी यह दिन प्रसिद्ध है, क्योंकि गणेशोत्सव का समापन भी इसी दिन होता है। गणपति बप्पा की विदाई के साथ-साथ इस दिन श्रीहरि विष्णु की पूजा का भी विशेष महत्व है।

अनंत पूजा का धार्मिक महत्व

Anant Chaturdashi का धार्मिक महत्व अत्यधिक है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा की जाती है। ‘अनंत’ का अर्थ होता है ‘असीम’ या ‘जिसका कोई अंत न हो।’ यह पर्व भगवान विष्णु की असीम शक्ति और उनके भक्तों के प्रति उनकी असीम कृपा को दर्शाता है।

माना जाता है कि इस दिन जो भी व्यक्ति भगवान विष्णु की पूजा करता है और अनंत सूत्र (एक विशेष धागा) को धारण करता है, उसकी सभी इच्छाएं पूरी होती हैं और उसे जीवन में सुख, समृद्धि और शांति प्राप्त होती है।

पूजा विधि

Anant Chaturdashi के दिन भक्तगण प्रातःकाल स्नान आदि करने के बाद व्रत का संकल्प लेते हैं और भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। पूजा के दौरान भगवान विष्णु के सामने अनंत सूत्र को धागे के रूप में रखा जाता है। इस धागे में 14 गांठें होती हैं, जो भगवान विष्णु के 14 लोकों के प्रतीक मानी जाती हैं।

पूजा के समय भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र के सामने धूप, दीप, फल, फूल और नैवेद्य अर्पित किया जाता है। इसके बाद अनंत सूत्र को भगवान विष्णु की प्रतिमा के पास रखकर उसकी पूजा की जाती है और फिर उसे भक्तगण अपनी कलाई में बांधते हैं। पुरुष दाहिने हाथ में और महिलाएं बाएं हाथ में इस सूत्र को बांधती हैं।

व्रत का महत्व

अनंत चतुर्दशी के दिन व्रत रखने का विशेष महत्व है। इस दिन उपवास रखकर भगवान विष्णु की आराधना करने से व्यक्ति को अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है। यह व्रत खासतौर पर उन लोगों के लिए फलदायी माना जाता है जो जीवन में किसी भी प्रकार की समस्या या बाधा का सामना कर रहे हैं।

माना जाता है कि जो व्यक्ति इस व्रत को श्रद्धा और विश्वास के साथ करता है, उसकी सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं और उसे जीवन में सफलता प्राप्त होती है। व्रत के दौरान सात्विक आहार का सेवन किया जाता है, और दिन भर भगवान विष्णु की आराधना की जाती है।

अनंत चतुर्दशी से जुड़ी पौराणिक कथा

Anant Chaturdashi से जुड़ी एक पौराणिक कथा है, जो इस पर्व के महत्व को और भी अधिक बढ़ाती है। इस कथा के अनुसार, प्राचीन काल में कौंडिन्य नामक एक ऋषि थे। उन्होंने अपनी पत्नी सुषीला के साथ अनंत व्रत का पालन किया, जिसके बाद उन्हें अपार सुख और समृद्धि की प्राप्ति हुई।

हालांकि, कौंडिन्य ऋषि ने एक बार अनंत सूत्र का अपमान किया और उसे तोड़ दिया, जिसके बाद उनका जीवन दुःखों से भर गया। तब उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने फिर से अनंत व्रत का पालन किया, जिसके बाद उनका जीवन फिर से सुखी हो गया।

इस कथा से हमें यह संदेश मिलता है कि भगवान विष्णु की आराधना और अनंत व्रत का पालन करने से व्यक्ति के जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं और उसे अपार सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

गणेश विसर्जन और अनंत चतुर्दशी का संबंध

Anant Chaturdashi का संबंध गणेश विसर्जन से भी है। गणेश चतुर्थी के दसवें दिन गणपति बप्पा का विसर्जन बड़े धूमधाम से किया जाता है। इस दिन भक्तगण गणपति बप्पा को विदा करते हैं और उनसे अगले वर्ष पुनः आने की कामना करते हैं।

गणेश विसर्जन के साथ ही Anant Chaturdashi का पर्व मनाया जाता है, जो भगवान विष्णु की आराधना का दिन है। इस दिन भक्तगण भगवान गणेश के साथ-साथ भगवान विष्णु की पूजा भी करते हैं और उनसे अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।

आधुनिक संदर्भ में अनंत चतुर्दशी का महत्व

आज के आधुनिक युग में भी अनंत चतुर्दशी का महत्व कम नहीं हुआ है। हालाँकि, समय के साथ इस पर्व को मनाने के तरीकों में कुछ बदलाव जरूर आए हैं, लेकिन श्रद्धा और आस्था वही बनी हुई है। आज भी लोग इस दिन व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु की पूजा करते हैं।

सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से लोग अब इस पर्व को और भी व्यापक रूप से मनाते हैं। ऑनलाइन पूजा, व्रत कथा और धार्मिक समारोहों का आयोजन किया जाता है, जिससे जो लोग किसी कारणवश घर पर नहीं रह सकते, वे भी इस पर्व का आनंद ले सकते हैं।

निष्कर्ष

Anant Chaturdashi 2024 का पर्व 17 सितंबर को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु की आराधना और अनंत सूत्र को धारण करने से सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं और व्यक्ति को जीवन में अपार सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है।

यह पर्व हमें भगवान के प्रति हमारी श्रद्धा और आस्था को बढ़ाने का अवसर देता है और हमें यह सिखाता है कि भगवान की कृपा से सभी समस्याओं का समाधान संभव है।

इस अनंत चतुर्दशी पर भगवान विष्णु की पूजा करके और अनंत सूत्र धारण करके आप भी अपने जीवन में सभी मुरादें पूरी करें और अपार सुख और समृद्धि की प्राप्ति करें।

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